MayarBhasha राजस्‍थानी

यशोधरा नवदशम् पर्व

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नवदशम् पर्व

मेरी नियति नियत हुई यह लेकिन तुम्हारी है बाक़ी
क्या लिखा है उसमे कौन कह सकता उस विधना की
राजमहल तुम लौटोगी या तुम रह जावो इस वन में
कौन कह सकता है क्या से क्या हो अगले क्षण में
इसीलिए यह नियति कब बदले नहीं पता जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।181।।

 

 हो सकता है तुम भी पकड़ो पथ मेरा वनगामी का
करदो किस दिन नाम जगत में ऊँचा अपने स्वामी का
सत्य क्या है खोज निकालो पता उस अनामी का
या फिर रहो महल में सब सुख भोगो स्वामी का
क्या होगा यह नहीं पता नियति देती सब करा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।182।।

 

 कितना अनिश्चित जीवन सबका न जाने क्या हो जाये
कौन चढ़े गिरि शिखर पर कौन गर्त में गुम जाये
हो जाये कौन अमर और कौन अनाम ही मर जाये
कौन प्राप्त कर के उसको और कौन हाथ से खो जाये
अब यही तुम्हारे संग है सोचो इस पर जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।183।।

 

अनिश्चित में एक ही निश्चित करना यहाँ से प्रस्थान
फिर भी जाने क्यों मानव है उससे अनजान
गजब जिजीविषा देखी मैंने तन कांटा सा सूखा
जीना वो  चाहता प्रतिपल चाहे नंगा हो भूखा
यह जिजीविषा देखी मैंने देखी पहली बार जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।184।।

 

अनिश्चित में से ही कोई निश्चित अगर हम कर पाये
तो ही मानो सही मायने में हम इस धर पर आये
वरना तो यह आना जाना बिन लक्ष्य भटकाव बना
सारा जीवन खोकर भी हाथ मनुज के कुछ न बना
बड़ी दुर्लभ है मानव देह इसका विचार करो जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।185।।

 

नही निश्चित जीवन फिर भी नित नवीन विचार यहाँ
जो है निश्चित वो आने तक नही करता सुधार यहाँ
बंधा हुआ है खुद बंधन में नहीं मुक्ति की चाह यहाँ
अगर चाहना हो मुक्ति की फिर बंधन नहीं यहाँ
बंधन से मुक्ति पाने का कोई प्रयत्न करो जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।186।।

 

जग के बंधन ही उसको बुला लेते है हर बार
मुश्किल से ही कोई कोई इस बंधन से पाता पार
बंधन में बंध जीव जगत में भूल जाता निज उद्धार
जो भी मुक्ति हेतु जाता उसे बुलाता वो बार बार
ऐसे में बंधन कैसे छूटे यही उलझन है जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।187।।

 

कोई कोई होता है जो बंधन सारे पल में देता तोड़
सीधे चलते जीवन में एकदम ले लेता है मोड़
ममता स्नेह प्रीती को भी देता पलभर में छोड़
ऐसे दुर्लभ जीवन की कर सकता है कोई होड़
ऐसा ही एक अवसर मुझको मिला है जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा।।188।।

 

आत्मदीप होने के लिए अगर मनुज विचार करे
तो हो सकता सब संभव इसी जन्म के ही भीतर
आत्मोद्धार नहीं कठिन मानव धार ले मन में अगर
मुक्त सब बंधन से होने का करे जो प्रयास जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा II 189 II

 

लौट सको तो लौट जाओ राहुल लालन पालन को
दुविधा में मत डालो तुम अब अपने इस मन को
यह पथ कठिन है अंतहीन जीना नहीं जीवन को
तप से भरा  यह जीवन मुश्किल है जीना इक क्षण को
जैसा भी उचित लगे निर्णय अपना देना जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा II190 II

 

रह न पाओगी शायद तुम इस खुले वातायन में
राजप्रशाद में निवास कर मुश्किल है इस निर्जन में
नहीं कोई साधन सुविधा कष्ट अनेक प्रकार रहे
यहाँ पड़ेंगे वो सब सहने जो कभी न तुमने है सहे
सुविधा साधन से दूर यहाँ का जीवन त्याग भरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा  II191II

 

यहाँ रहो या वहां रहो अंतर तो अब कुछ न रहा
तुम तो हरदम साथ हमारे चाहे रहो तुम भी जहां
निर्णय है आधीन तुम्हारे देवी जैसे चाहे करो
चलना चाहो मेरे पथ तो फिर न कोई देर करो
स्वीकार निमंत्रण करलो तुम निवेदन मेरा है जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा  II 192 II

 

क्यों शंशय तुम्हारे मन में संशय त्याग करो
मार्ग एक ही चुनना तुम जो भी अच्छा लाग करो
शायद अब निर्णय की बेला आ चुकी ऐसा लगता
तभी सवेरा मानो जग में जब भी कोई है जगता
सत्य पथ पर चलने हेतु तुम भी जाग जाओ जरा
शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा  II 193 II

 

निश्चय मन का आज बता दो कहदो अंतिम इच्छा को
निर्णय तो लेना ही होगा जीवन की परीक्षा को
उहापोह में तुम न रहो इतना सा निवेदन है
क्या निर्णय तुम लेती विषय बड़ा संवेदन है
अब अंतिम वो वाक्य अधरों से बताओ जरा

शाक्यमुनि अब यह कहते सुनो बात तुम यशोधरा  II194 II


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लेखक परिचय

श्री श्रवण सिंह राजावत
जयपुर जिले की फागी तहसील अंतर्गत डाबिच गांव में 1 जुलाई 1968 को जन्मे कवि श्रवण सिंह राजावत की प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम डाबिच में ही हुई।हायर सेकेंडरी शिक्षा चाकसू से करने के बाद जयपुर के कामर्स कालेज से बी काम की डिग्री हासिल की।पंजाब नेशनल बैंक में लिपिक पद पर 7 वर्ष सेवा करने के बाद राजस्थान तहसीलदार सेवा में चयनित हुए।वहां से पदोन्नत होकर राजस्थान प्रशासनिक सेवा में वर्तमान में एस डी एम् चोह्टन पदस्थापित है।प्रख्यात राजस्थानी कवि लक्ष्मण सिंह रसवन्त के दामाद होने से कविता के क्षेत्र में कई राजस्थानी कवियों के संपर्क में आये और लेखन के क्षेत्र में आगे बढे।चालक सतसई,मीरा सतसई राजस्थानी में लिखी है।यशोधरा व् उर्मिला पर हिंदी खंडकाव्य लिखा है।अभी भगवान राम के जीवन पर पद लिख रहे है।